योगिनी एकादशी तिथि जनवरी-फरवरी माह के उज्ज्वल पक्ष में आती होती। यह एकादशी भगवान নারায়ণ की आराधाना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती। पौराणिक कथाओं के अनुसार योगिनी एकादशी को योगिनी अमर देवता की जागृति होती हैं, इसलिए इस दिन योगिनी मंत्रों का जप करने में विशाल फायदे होता है। अनुष्ठान तरीका में योगिनी देवता की वंदना करना, भगवान নারায়ণ की website आरती करना और उपवास रखना शाम को परिपूर्ण करना शामिल होती।
योगिनी एकादशी उपवास: क्या आता है, विधि से रखें पारण
योगिनी एकादशी का विशेष व्रत एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जो मार्गशीर्ष मास के शूकल पक्ष में आता है। यह एकादशी विशेषकर विधवाओं के लिए बहुत फलदायी जाती है। योगिनी एकादशी का {पारण|व्रत पारण|उपवास पारण) करना महत्वपूर्ण है। {पारण|व्रत पारण|उपवास पारण) के दिन सूर्य की किरण देखकर इसे पूर्ण जाना आवश्यक है। {पारण|व्रत पारण|उपवास पारण) की विधि कुछ खाद्य पदार्थ का विशेष संयोग जाना उचित है, जैसे दही और भी मिठाई।
यह एकादशी की व्रत करने के बाद निम्नलिखित कार्य की आभार देना उचित है:
- इस तिथि का विशेष निर्जल फास्टिंग जाना चाहिए।
- छाता और शक्कर की सेवन जाना उचित है।
- {पारण|व्रत पारण|उपवास पारण) के लिए देव को भंडारा करना करना चाहिए।
योगिनी एकादशी की कथा: जानें पौराणिक महत्व
योगिनी एकादशी की कथा एक विशाल और रोचक पौराणिक कथा है |यह कहती है कि प्राचीन काल में, राजा विशाल अपने राज्य में एक ब्राह्मण के घर में भोजन के लिए गए |उनके आग्रह के बावजूद, ब्राह्मण ने भोजन से अस्वीकार किया |ब्राह्मण का अस्वीकार देखकर, राजा क्रुद्ध हो गए और ब्राह्मण को मार दिया |बाद में, राजा को गrief हुआ और उन्होंने योगिनी एकादशी का व्रत किया |इस व्रत से ब्राह्मण को जल्दी जन्म मिला और राजा का पाप दूर हुआ |इसलिए, इस एकादशी का महत्व अधिक है |
योगिनी एकादशी व्रत का के अद्भुत फल तथा दक्षिणा के नियम
योगिनी एकादशी के व्रत करना अत्यंत फलदायी माना गया। इस दिन का विष्णु को उपासना करने उत्कृष्ट लाभ प्राप्त गया। मान्यता है कि इसकी एकादशी के व्रत में हर कपातों के शमन होता। दान के विधि के मुख्य है कि इस दिन के ब्रह्ममुहूर्त के अभावग्रस्त और विद्वानों को भेंट करना चाहिए। उसकी अतिरिक्त, पवित्र जल, छायादार ठिकाना और धान्य के दक्षिणा करना अति उत्तम जाता है।
इस वर्ष योगिनी की एकादशी किस दिन है? पंचांग से जानें
इस साल योगिनी की एकादशी का महत्व क्या है? बहुत से भक्त यह जानना चाहते हैं कि इस साल योगिनी एकादशी किस तिथि को मनाई जायेगी । हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, योगिनी एकादशी तिथि 2024 को 15 मई को को है। तिथि गणना {में | के अनुसार | के अनुसार) सटीक जानकारी दी गई है, जिसके बुनियाद पर श्रद्धालु एकादशी का व्रत करने की तैयारी सकते हैं ।
योगिनी एकादशी पर इस विशेष: दुर्लभ योग का महत्व
योगिनी एकादशी का यह दिन आने से ही, एक अति विशेष और दुर्लभ योग के साथ जुड़ा हुआ है। इस योग में, चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का साथ साथ अन्य ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसे योग में आने वाली एकादशी का महत्व असाधारण होता है, और यह सभी मनुष्यों के लिए आशीर्वाद लेने का एक अति श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है। इस योग में ईश्वर की कृपा अधिक रहती {है, और भक्तों की कामनाएं पूर्ण होती हैं।